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खंड 1 — भीतर बैठा दुश्मन
05
ईर्ष्या: तुम अपने झूठ से हारते हो
मुद्रित पुस्तक में पृष्ठ 31
डर, लालच, अहंकार, क्रोध — बाहर की हर व्यवस्था यहीं से शुरू होती है।
- डर
- लालच
- अहंकार
- क्रोध
- ईर्ष्या
- अकेलापन
तीन सवाल
- 01
पिछली बार किसकी सफलता की ख़बर सुनकर आपका मन ख़राब हुआ था?
- 02
अब सोचिए — वह आदमी आपसे कितना मिलता-जुलता है?
- 03
और आख़िरी सवाल: क्या आपने कभी किसी की आलोचना इसलिए की क्योंकि वह ग़लत था — या इसलिए, क्योंकि वह आगे था?
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