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एक ज़ुल्म हटाकर दूसरा ज़ुल्म बिठा देना क्रांति नहीं है। वह सिर्फ़ पहरेदार बदलना है।
समाजप्रवेशविचारों का विद्रोह
एक ज़ुल्म हटाकर दूसरा ज़ुल्म बिठा देना क्रांति नहीं है। वह सिर्फ़ पहरेदार बदलना है।
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