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खंड 1 — भीतर बैठा दुश्मन
01
डर बिकता है, और हम सब ख़रीदार हैं
मुद्रित पुस्तक में पृष्ठ 15
डर, लालच, अहंकार, क्रोध — बाहर की हर व्यवस्था यहीं से शुरू होती है।
- डर
- लालच
- अहंकार
- क्रोध
- ईर्ष्या
- अकेलापन
तीन सवाल
- 01
आपकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा फ़ैसला किस डर ने लिया था?
- 02
आज आप जो काम नहीं कर पा रहे, उसे रोकने वाला डर किसने आपको दिया?
- 03
और वह कौन-सी बात है जो आप वर्षों से कहना चाहते हैं, पर कह नहीं पाए?
इनका जवाब मुझे मत दीजिए। अपने आपको दीजिए, अकेले में।
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